जो बीत गई सो बात गई : Jo beet gaya so baat gayi Poem and Lyrics

Dosto aaj me aapko Harivansh Raii Bachhan ji ki sabase behatrin Kavita ke bare me poori jankari dunga, is kavita ko padkar ek khoye hue insan me bhi kuchh kar gujarana ka josh aa jata he, sath me ek or kavita jise padkar sunkar aapka rom rom praphullit ho jayega,

Jo beet gaya so baat gayi Poem

जीवन में एक सितारा था

माना वह बेहद प्यारा था

वह डूब गया तो डूब गय

अंबर के आंगन को देखो

कितने इसके तारे टूट

कितने इसके प्यारे छूटे

जो छूट गये फिर कहाँ मिले

पर बोलो टूटे तारों पर

कब अंबर शोक मनाता है

jo beet gaya so baat gayi poem

जो बीत गई सो बात गई

 

जीवन में वह था एक कुसुम

थे उस पर नित्य निछावर तुम

वह सूख गया तो सूख गया

मधुबन की छाती को देखो

सूखी कितनी इसकी कलियाँ

मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ

जो मुरझाईं फिर कहाँ खिली

पर बोलो सूखे फूलों पर

कब मधुबन शोर मचाता है

 

जो बीत गई सो बात गई

 

जीवन में मधु का प्याला था

तुमने तन मन दे डाला था

वह टूट गया तो टूट गया

मदिरालय का आंगन देखो

कितने प्याले हिल जाते हैं

गिर मिट्टी में मिल जाते हैं

जो गिरते हैं कब उठते हैं

पर बोलो टूटे प्यालों पर

कब मदिरालय पछताता है

 

जो बीत गई सो बात गई

 

मृदु मिट्टी के बने हुए हैं

मधु घट फूटा ही करते हैं

लघु जीवन ले कर आए हैं

प्याले टूटा ही करते हैं

फिर भी मदिरालय के अन्दर

मधु के घट हैं मधु प्याले हैं

जो मादकता के मारे हैं

वे मधु लूटा ही करते हैं

वह कच्चा पीने वाला है

जिसकी ममता घट प्यालों पर

जो सच्चे मधु से जला हुआ

कब रोता है चिल्लाता है

जो बीत गई सो बात गई

Optimization WordPress Plugins & Solutions by W3 EDGE