प्रेरक कहानी – इच्छापूर्ति वॄक्ष। Ikshapoorti Vraksha

🌴 *इच्छापूर्ति वॄक्ष* 🌴
                 एक घने जंगल में एक *इच्छापूर्ति वृक्ष* था, उसके नीचे बैठ कर कोई भी *इच्छा* करने से वह *तुरंत पूरी* हो जाती थी।

                यह बात बहुत कम लोग जानते थे..क्योंकि उस घने जंगल में जाने की कोई *हिम्मत ही नहीं* करता था।

                  एक बार संयोग से एक थका हुआ *व्यापारी* उस वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी नींद लग गई। 

                 *जागते ही* उसे बहुत *भूख लगी* ,उसने आस पास देखकर सोचा- ‘ काश *कुछ खाने को मिल जाए !*’ तत्काल स्वादिष्ट *पकवानों से भरी थाली* हवा में तैरती हुई उसके सामने आ गई।

                   व्यापारी ने *भरपेट खाना* खाया और भूख शांत होने के बाद सोचने लगा..

                *काश कुछ पीने को मिल जाए..*’ तत्काल उसके सामने हवा में तैरते हुए अनेक *शरबत* आ गए।

                  *शरबत* पीने के बाद वह आराम से बैठ कर सोचने लगा-   ‘ *कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा हूँ।*

            हवा में से खाना पानी प्रकट होते पहले कभी नहीं देखा न ही सुना..जरूर इस *पेड़ पर कोई भूत* रहता है जो मुझे खिला पिला कर बाद में *मुझे खा लेगा*  ऐसा सोचते ही तत्काल उसके सामने एक *भूत आया और उसे खा गया।*

              इस प्रसंग से आप यह सीख सकते है कि *हमारा मस्तिष्क ही इच्छापूर्ति वृक्ष है आप जिस चीज की प्रबल कामना करेंगे  वह आपको अवश्य मिलेगी।*

               अधिकांश लोगों को जीवन में बुरी चीजें इसलिए मिलतीहैं…..

क्योंकि वे *बुरी चीजों की ही कामना* करते हैं।

                   इंसान ज्यादातर समय सोचता है-कहीं बारिश में भीगने से मै *बीमार न हों जाँऊ* ..और वह *बीमार हो जाता हैं*..!

              

                इंसान सोचता है – मेरी *किस्मत ही खराब* है .. और उसकी *किस्मत सचमुच खराब* हो जाती हैं ..!

       

              इस तरह आप देखेंगे कि आपका *अवचेतन मन* इच्छापूर्ति वृक्ष की तरह आपकी *इच्छाओं को ईमानदारी से पूर्ण* करता है..!

                इसलिए आपको अपने मस्तिष्क में *विचारों को सावधानी से प्रवेश* करने की *अनुमति देनी चाहिए।*

               यदि *गलत विचार* अंदर आ जाएगे तो *गलत परिणाम* मिलेंगे। *विचारों पर काबू* रखना ही अपने *जीवन पर काबू* करने का रहस्य है..!

            आपके *विचारों से ही* आपका  *जीवन* या तो.. 

*स्वर्ग* बनता है या *नरक*..उनकी बदौलत ही आपका *जीवन सुखमय या दुख:मय* बनता है..

              *विचार जादूगर* की तरह होते है , जिन्हें *बदलकर* आप अपना *जीवन बदल* सकते है..!

           इसलिये सदा *सकारात्मक सोच* रखें .. यदि आप *अच्छा सोचने लगते है*तो पूरी *कायनात* आपको और अच्छा *देने में लग जाती है।*

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